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Tuesday, 22 December 2015

पाठ - 7 धर्म की आड़ अन्य परीक्षापयोगी प्रश्न और उत्तर। स्पर्श भाग - I

Extra Questions and Answer from Chapter 7 Dharm ki aad Sparsh Bhaag I

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

1. देश के सभी शहरों का यही हाल है। उबल पड़ने वाले साधारण आदमी का इसमें केवल इतना ही दोष है कि वह कुछ भी नहीं समझता-बुझता, और दूसरे लोग उसे जिधर जोत देते हैं, उधर जुट जाता है। यथार्थ दोष है, कुछ चलते-पुरज़े, पढ़े लिखे लोगों का, जो मूर्ख लोगों की शक्तियों का और उत्साह का दुरूपयोग इसलिए कर रहे हैं कि इस प्रकार, जाहिलों के आधार पर उनका नेतृत्व और बड़प्पन कायम रहे। इसके लिए धर्म और ईमान की बुराइयों से काम लेना उन्हें सबसे सुगम मालुम पड़ता है। सुगम है भी।

(क) कौन किसका दुरूपयोग कर रहा है और क्यों?              (2)
(ख) साधारण आदमी का क्या दोष है?                               (1)
(ग) चलते-पुरज़े किन्हें कहा गया है और वे क्या करते हैं?    (2)

उत्तर

 (क) कुछ चालाक और पढ़े-लिखे लोग मूर्ख लोगों की शक्तियों और उत्साह का दुरूपयोग धर्म के नाम पर अपना नेतृत्व और बड़प्पन कायम रखने के लिए कर रहे हैं।
(ख) साधारण आदमी का दोष यह है की वह कुछ समझता-बुझता नहीं है, केवल उबल पड़ता है। दूसरे लोग जिधर जोत देते हैं उधर जुत जाता है।
(ग) चलते-पुरज़े कुछ पढ़े-लिखे लोगों को कहा गया है। वे लोग धर्म और ईमान की बुराइयों से लाभ उठाकर मूर्ख लोगों की शक्तियों का दुरुपयोग अपने फायदे के लिए करते हैं।

2. हमारे देश में धनपतियों का इतना ज़ोर नहीं है। यहाँ धर्म में नाम पर कुछ इन-गिने आदमी अपने हैं स्वार्थों की सिद्धि के लिए करोड़ों आदमियों की शक्ति का दुरूपयोग किया करते हैं। गरीबों का धनाढ्यों द्वारा चूसा इतना बुरा नहीं है, जितना बुरा यह है कि वहाँ है धन की मार, यहाँ पर है बुद्धि की मार। वहाँ धन दिखाकर करोड़ो को वश में किया जाता है और फिर मनमाना धन पैदा करने के लिए जोत दिया जाता है। यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना-भिड़ाना।

(क) पाश्चात्य देशों और भारत में क्या अंतर है?     (2)
(ख) आज धर्म के नाम पर क्या होता है?                (1)
(ग) 'बुद्धि पर परदा डालना' का क्या अर्थ है?         (1)

उत्तर

(क) पाश्चात्य देशों में धन दिखाकर लोगों को वश में करते हैं और भारत में धर्म के नाम पर लोगों की शक्ति को दुरूपयोग किया जा रहा है।
(ख) आज धर्म के नाम पर कुछ गिने-चुने लोग अपने स्वार्थ सिद्धि क लिए करोड़ों लोगों की शक्तियों करते हैं।
(ग) 'बुद्धि पर परदा डालना' का अर्थ है कुछ सोचने-समझने की ताकत को खत्म करना जैसा आज के समय में धर्म के नाम पर किया जा रहा है।

3. धर्म की उपासना के मार्ग में कोई रुकावट न हो। जिसका मन जिस प्रकार चाहे, उसी प्रकार धर्म की भावना को अपने मन में जगावे। धर्म और ईमान, मन का सौदा हो, ईश्वर और आत्मा के बीच का संबंध हो, आत्मा को शुद्ध करने और ऊँचा उठाने का साधन हो। वह किसी दशा में भी, किसी दूसरे व्यक्ति की स्वाधीनता को छीनने या कुचलने का साधन न बने। आपका मन चाहे, उस तरह का धर्म आप मानें और दूसरों का मन चाहे, उस प्रकार का धर्म वह माने। दोनों भिन्न धर्मों को मानने वालों को टकरा जाने के लिए कोई भी स्थान न हो। यदि किसी धर्म के मानने वाले कहीं जबरदस्ती टाँग अड़ाते हों, तो उनका इस प्रकार का कार्य देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाए।

(क) धर्म किस बात का साधन है?                                              (1)
(ख) विभिन्न धर्मों का संबंध कैसा होना चाहिए?                        (2)
(ग) कौन सा कार्य देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाए?   (2)

उत्तर

(क) धर्म आत्मा को शुद्ध करने और ऊँचा उठाने का साधन है।
(ख) विभिन्न धर्मों का संबंध ऐसा होना चाहिए कि उनके मानने वालों के टकरा जाने के लिए कोई भी स्थान ना हो।
(ग) यदि किसी धर्म के मानने वाले कहीं जबरदस्ती टाँग अड़ाते हों तो उनका यह कार्य देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाए।

4. देश की स्वाधीनता के लिए जो उद्योग किया जा रहा था, उसका वह दिन निःसंदेह, बुरा था, जिस दिन स्वाधीनता के क्षेत्र में ख़िलाफ़त, मुल्ला, मौलवियों और धर्माचार्यों को स्थान दिया जाना आवश्यक समझा गया। एक प्रकार से उस दिन हमने स्वाधीनता के क्षेत्र में, एक कदम पीछे हटकर रखा था। अपने उसी पाप का फल आज हमें भोगना पड़ रहा है। देश को स्वाधीनता के संग्राम ही ने मौलना अब्दुल बारी और शंकराचार्य को देश के सामने दूसरे रूप में पेश किया, उन्हें अधिक शक्तिशाली बना दिया और हमारे इस काम का फल यह हुआ कि इस समय, हमारे हाथों से ही बढ़ाई इनकी और इनके से लोगों की शक्तियाँ हमारी जड़ उखाड़ने और देश में मज़हबी पागलपन, प्रपंच और उत्पात का राज्य स्थापित कर रही हैं।

(क) देश की स्वाधीनता का कौन सा दिन सबसे बुरा था?                                  (1)
(ख) हमने कब स्वाधीनता के क्षेत्र में एक कदम पीछे हटकर रखा और क्यों?      (2)
(ग) हमारे मज़हबी कार्य का फल क्या हुआ?                                                    (2)

उत्तर

(क) देश की स्वाधीनता का वह दिन सबसे बुरा था जिस दिन स्वाधीनता के क्षेत्र में ख़िलाफ़त, मुल्ला, मौलवियों और धर्माचार्यों को स्थान दिया गया।
(ख) स्वाधीनता के क्षेत्र में हमने धर्म को स्थान देकर एक कदम पीछे हटकर रखा क्योंकि हमने मज़हब को स्थान दिया जिससे टकराव की स्थिति और बढ़ गयी।
(ग) हमारे मज़हबी कार्यों का फल यह हुआ कि हमारे द्वारा बढ़ाई गई मुल्ला-मौलवियों और धर्माचार्यों की शक्ति हमारी जड़ें उखाड़ने, मज़हबी पागलपन, प्रपंच और उत्पात का राज्य स्थापित कर रही हैं।

5. ऐसे धार्मिक और दीनदार आदमियों से तो वे ला-मज़हब और नास्तिक आदमी कहीं अधिक अच्छे और ऊँचे हैं, जिनका आचरण अच्छा है, जो दूसरों के सुख-दुःख का ख्याल रखते हैं और जो मूर्खों को किसी स्वार्थ सिद्धि के लिए उकसाना बहुत बुरा समझते हैं। ईश्वर इन नास्तिक और ला-मज़हब लोगों को अधिक प्यार करेगा और वह अपने पवित्र नाम पर अपवित्र काम करने वालों से यही कहना पसंद करेगा, मुझे मानो या ना मानो, तुम्हारे मानने से ही मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोडो और आदमी बनो।

(क) कौन लोग किससे अधिक अच्छे हैं?                                                                                         (2)
(ख) ईश्वर किन लोगों से प्यार करेगा?                                                                                           (1)
(ग) 'दया करके मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोडो और आदमी बनो।' इस पंक्ति का क्या अर्थ है?  (2)

उत्तर

(क) ला-मज़हबी और नास्तिक लोग जिनका आचरण अच्छा है, धार्मिक और ईमानदार लोगों से अच्छे हैं।
(ख) ईश्वर उनलोगो से अधिक प्यार करेगा जिनका आचरण अच्छा है, जो दूसरों लोगों के सुख-दुःख का ख्याल करते हैं और जो मूर्खों को किसी स्वार्थ सिद्धि के लिए उकसाना बहुत बुरा समझते हैं।
(ग) इस पंक्ति का अर्थ है कि हमें ईश्वर को मानने या ना मानने से पहले मनुष्यता को मानना चाहिए। अपने स्वार्थ के लिए धर्म के नाम पर उत्पात नहीं मचाना चाहिए। हिंसा रूपी पशु को त्यागकर दूसरों की भलाई का काम करना चाहिए।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये-

1. आज धर्म और ईमान के नाम पर कौन-कौन से ढोंग किये जाते हैं?

उत्तर

आज धर्म और ईमान के नाम पर उत्पात, जिद और झगडे करवाये जाते हैं। अपने स्वार्थ को पूरा करने लिए धर्म को साधन बनाया जाता है और दंगे कराये जाते हैं। आम आदमी धर्म को जाने या ना जाने परन्तु धर्म के नाम पर जान देने और लेने के लिए तैयार हो जाता है।

2. पाश्चात्य देशों और हमारे देश में क्या अंतर है? पाठ के आधार पर लिखिए।

उत्तर

पाश्चात्य देशों में धन का बोलबाला है। वहाँ धनी लोग गरीब लोगों को धन दिखाकर उनका शोषण करते हैं। हमारे देश में धन का उतना ज़ोर नहीं है। यहाँ कुछ लोग बुद्धि पर पर्दा डाल धर्म के नाम पर स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को आपस में भिड़ाते हैं।

3. लेखक के अनुसार धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए?

उत्तर

लेखक के अनुसार धर्म का विषय व्यक्ति के मन के ऊपर हो। जिसका मन जिस प्रकार चाहे उसी प्रकार का धर्म माने। यह आत्मा को शुद्ध करने और ऊँचा उठाने का साधन है। यह किसी दूसरे व्यक्ति की स्वाधीनता को छीनने या कुचलने का साधन ना बने।

4. अजाँ देने, शंख बजाने, नाक दबाने और नमाज़ पढ़ने का नाम धर्म नहीं है। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

घंटों पूजा कर, शंख बजाकर और पंच-वक्ता नमाज़ अदा कर कोई सच्चा धार्मिक नहीं हो जाता। ऐसा करने के बाद अगर व्यक्ति बुरे काम में लिप्त है तो यह धर्म का पालन नहीं हुआ। शुद्धाचरण और सदाचरण ही सच्चा धर्म है। अगर आपका आचरण अच्छा नहीं है तो पूजा-पाठ और नमाज़ अदायगी व्यर्थ के कार्य हैं।

धर्म की आड़ - पठन सामग्री और सार

NCERT Solutions for Class 9th: पाठ 7- धर्म की आड़

Saturday, 12 December 2015

पाठ 6 - कीचड़ का काव्य अन्य परीक्षापयोगी प्रश्न और उत्तर। स्पर्श भाग - I

Extra Questions and Answer from Chapter 6 Kichad kaa kaavy Sparsh Bhaag I

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

1. हम आकाश का वर्णन करते हैं, पृथ्वी का वर्णन करते हैं, जलाशयों का वर्णन करते हैं, पर कीचड़ का वर्णन कभी किसी ने किया है? कीचड़ में पैर डालना कोई पसंद नहीं करता है, कीचड़ से शरीर गन्दा होता है, कपडे मैले हो जाते हैं। अपने शरीर पर कीचड़ उड़े यह किसी को अच्छा नहीं लगता और इसलिए कीचड़  किसी को सहानुभूति नहीं होती। यह सब यथार्थ है किन्तु तटस्थ्ता  से सोचें तो हम देखेंगे कि कीचड़ में कुछ कम सौंदर्य नहीं है। पहले तो यह की कीचड़ का रंग बहुत सुन्दर है। पुस्तकों के गत्तों पर, घरों की दीवालों पर अथवा शरीर के कीमती कपड़ों के लिए हम सब कीचड़ के जैसे रंग पसंद करते हैं। कलाभिज्ञ लोगों की भट्टी में पकाये हुए मिट्टी के बर्तनों के लिए यही रंग बहुत पसंद है। फोटो लेते समय भी यदि उसमें कीचड़ का, एकाध ठीकरे का रंग आ जाए तो उसे वार्मटोन कहकर विज्ञ लोग खुश हो जाते हैं। पर लो, कीचड़ का नाम लेते ही सब बिगड़ जाता है।

(क) हम प्रकृति के किन रूपों का प्रायः वर्णन करते हैं?   (1)
(ख) लोग कीचड़ को पसंद क्यों नहीं करते?                   (2)
(ग) कीचड़ का रंग कहाँ-कहाँ पसंद किया जाता है?        (2)

उत्तर

(क) हम प्रकृति के सुंदर रूपों आकाश, पृथ्वी, जालशयों आदि का प्रायः वर्णन करते हैं।
(ख) लोग कीचड़ को पसंद इसलिए नहीं करते क्योंकि इससे शरीर गन्दा होता है, कपडे मैले हो जाते हैं।
(ग) कीचड़ का रंग पुस्तकों के गत्तों पर, घरों की दीवालों पर और शरीर के कीमती कपड़ों के लिए पसंद किया जाता है। कलाभिज्ञ लोगों की भट्टी में पकाये हुए मिट्टी के बर्तनों के लिए कीचड़ का रंग बहुत पसंद है।

2. कीचड़ देखना है तो गंगा किनारे या सिंधु के किनारे और इतने से तृप्ति ना हो तो सीधे खंभात पहुँचना चाहिए। वहाँ मही नदी के मुख से आगे जहाँ तक नज़र पहुँचे वहाँ तक सर्वत्र सनातन कीचड़ ही देखने को मिलेगा। इस कीचड़ में हाथी डूब जाएँगे ऐसा कहना, न शोभा दे ऐसी अलोपक्ति करने जैसा है। पहाड़ के पहाड़ उसमें लुप्त हो जाएँगे, ऐसा कहना चाहिए।
हमारा अन्न  कीचड़ में से ही पैदा होता है इसका जाग्रत भान हर एक मनुष्य को होता तो वह कभी कीचड़ का तिरस्कार न करता।

(क) इस कीचड़ में हाथी भी डूब जाएँ -का क्या आशय है? इस कीचड़ में क्या-क्या डूब सकते हैं?        (2)
(ख) मही नदी के मुख के आगे स्थित कीचड़ की क्या विशेषता है?                                                  (1)
(ग) मनुष्य कीचड़ का तिरस्कार करना कब छोड़ेगा?                                                                     (1)

उत्तर

(क) इस कथन का आशय है कि कीचड़ बहुत जयादा तथा गहरा होता है। इस कीचड़ में पहाड़ के पहाड़ डूब सकते हैं।
(ख) मही नदी के मुख के आगे से जहाँ तक नजर पहुँचे वहाँ तक सर्वत्र सनातन कीचड़ ही देखने को मिलता है।
(ग) मनुष्य को जब यह जाग्रत भान हो जाएगा कि उसका अन्न कीचड़ से ही पैदा होता है तब वह इसका तिरस्कार करना छोड़ेगा।

3.नदी के किनारे जब कीचड़ सुखकर उसके टुकड़े हो जाते हैं, तब वे कितने सुन्दर दिखते हैं। ज्यादा गर्मी से जब उन्हीं टुकड़ों में दरारें पड़ती हैं और वे टेढ़े हो जाते हैं, तब वे सुखाये हुए खोपरे जैसे दीख पड़ते हैं। नदी किनारे मीलों तक जब समतल और चिकना कीचड़ एक-सा फैला हुआ होता है, तब वह दृश्य कुछ कम खूबसूरत नहीं होता। इस कीचड़ का पृष्ठ भाग कुछ सुख जाने पर उस पर बगुले और अन्य छोटे-बड़े पक्षी चलते हैं, तब तीन नाख़ून आगे और अँगूठा पीछे ऐसे अनेक पदचिह्न, मध्य एशिया के रास्ते की तरह दूर-दूर तक अंकित देख इसी रास्ते अपना कारवाँ ले जाने की इच्छा हमें होती है।

(क) नदी के किनारे कीचड़ कब सुखाये हुए खोपडे जैसे दिखाई देते हैं?            (1)
(ख) नदी के किनारे कौन सा दृश्य खूबसूरत होता है?                                     (1)
(ग) लेखक को क्या देख अपना कारवाँ उस रास्ते ले जाने की इच्छा होती है?   (2)

उत्तर

(क) जब ज्यादा गर्मी पड़ती है तब नदी के किनारे सूखे पड़े कीचड़ कर टुकड़ों में दरारें पड़ जाती हैं तब वे सुखाये हुए खोपडे जैसे दिखाई देते हैं।
(ख) नदी के किनारे मीलों तक जब समतल और चिकना कीचड़ एक-सा फैला हुआ होता है, तब वह दृश्य खूबसूरत होता है।
(ग) कीचड़ का पृष्ठ भाग कुछ सूख जाने पर उस पर बगुले और अन्य छोटे-बड़े पक्षी चलते हैं, तब तीन नाख़ून आगे और अँगूठा पीछे ऐसे अनेक पदचिह्न, मध्य एशिया के रास्ते की तरह दूर-दूर तक अंकित देख लेखक को अपना कारवाँ इस रास्ते ले जाने की इच्छा होती है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये-

1. रंग की सारी शोभा कहाँ जमी थी?

उत्तर

रंग की सारी शोभा उत्तर में जमी थी।

2. कवि कीचड़ का वर्णन क्यों नहीं करते?

उत्तर

कवि बाहरी सौंदर्य को ज्यादा महत्व देते हैं, उनकी उपयोगिता को महत्व नहीं देते इसलिए कवि कीचड़ का वर्णन नहीं करते।

3. कीचड़ कब सुन्दर दिखते हैं?

उत्तर

नदी के किनारे जब कीचड़ सुखकर उसके टुकड़े हो जाते हैं तब कीचड़ सुन्दर दिखते हैं।

4. लेखक के अनुसार हमें कीचड़ देखने के लिए कहाँ जाना चाहिए?

उत्तर

लेखक के अनुसार हमें कीचड़ देखने के लिए गंगा के किनारे या सिंधु के किनारे जाना चाहिए। अगर इतने से भी संतुष्टि ना मिले तो खंभात जाना चाहिए।

5. आशय सपष्ट कीजिये "नदी के किनारे अंकित पद चिह्न और सींगों के चिह्नों से मानो महिषकुल के भारतीय युद्ध का पूरा इतिहास ही इस कर्दम लेख में लिखा हो भास होता है।"

उत्तर

इस कथन का आशय है कि नदी के किनारे कीचड़ सूखी कीचड़ में जब दो भैंस के बच्चे मस्त होकर अपने सींगों को उस कीचड़ में धँसाकर रौंदते और लड़ते हैं तो उनके लड़ने से कीचड़ में उनके पद चिह्न और सींगों के चिह्न अंकित हो जाते हैं जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो महिषकुल के सभी भारतीय युद्ध का पूरा इतिहास कीचड़ में लेख के रूप लिख दिया गया हो।

कीचड़ का काव्य - पठन सामग्री और सार

NCERT Solutions for पाठ 6 - कीचड़ का काव्य

Thursday, 3 December 2015

पाठ 5 - वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन् अन्य परीक्षापयोगी प्रश्न और उत्तर। स्पर्श भाग - I

Extra Questions and Answer from Chapter 5 Vaigyanik chetna ke vaahak Chandrashekhar Venkat Raman Sparsh Bhaag I

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

1. बात सन् 1921 की है, जब रामन् समुद्री यात्रा पर थे। जहाज के डेक पर खड़े होकर नीले समुद्र को निहारना, प्रकृत-प्रेमी रामन् को अच्छा लगता था। वे समुद्र की नीली आभा में घंटों खोये रहते। लेकिन रामन् केवल भावुक प्रकृति-प्रेमी ही नहीं थे। उनके अंदर एक वैज्ञानिक की जिज्ञासा भी उतनी ही सशक्त थी। यही जिज्ञासा उनसे सवाल कर बैठी- 'आखिर समुद्र का रंग नीला ही क्यों होता है? कुछ और क्यों नहीं?' रामन् सवाल का जवाब ढूँढने में लग गए। जवाब ढूँढ़ते ही वे विश्वविख्यात बन गए।

(क) रामन् समुद्री यात्रा पर कब गए थे?                                                         (1)
(ख) रामन् को जहाज के डेक से किसे निहारना अच्छा लगता था और क्यों?     (2)
(ग) रामन् के अंदर की वैज्ञानिक जिज्ञासा क्या प्रश्न कर बैठी?                        (2)

उत्तर

(क)  रामन् सन् 1921 में समुद्री यात्रा पर गए थे।
(ख) रामन् को जहाज के डेक से नील समुद्र को घंटों निहारना अच्छा लगता था क्योंकि वे भावुक प्रकृति प्रेमी थे।
(ग) समुद्र के पानी का रंग नीला ही क्यों होता है? कोई और क्यों नहीं होता है? रामन् के अंदर की वैज्ञानिक जिज्ञासा इन प्रश्नों को कर बैठी।

2. रामन् का मस्तिष्क विज्ञान के रहस्यों को सुलझाने के लिए बचपन से ही बैचैन रहता था। अपने कॉलेज के ज़माने से ही उन्होने शोधकार्यों में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था। उनका पहला शोधपत्र फिलॉसॉफिकल मैगज़ीन में प्रकाशित हुआ था। उनकी दिली इच्छा तो यही थी कि वे अपना सारा जीवन शोधकार्यों को समर्पित कर दें, मगर उन दिनों शोधकार्यों को पूरे समय के कैरियर के रूप में अपनाने की कोई ख़ास व्यवस्था नहीं थी। प्रतिभावान छात्र सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित होते थे। रामन् भी अपने समय के सुयोग्य छात्रों की भाँति भारत सरकार के वित्त विभाग में अफसर बन गए। उनकी तैनाती कलकत्ता में हुई।

(क) किन रहस्यों को सुलझाने में रामन् का मस्तिष्क बैचैन रहता था?                (1)
(ख) रामन् की दिली इच्छा क्या था?                                                                  (1)
(ग) वे सरकारी नौकरी की ओर क्यों आकर्षित हुए और उनकी तैनाती कहाँ हुई?    (2)

उत्तर

(क) विज्ञान के रहस्यों को सुलझाने में रामन् का मस्तिष्क बैचैन रहता था।
(ख) रामन् की दिली इच्छा अपना सारा जीवन शोधकार्य को समर्पित कर देने की थी।
(ग) वे सरकारी नौकरी की ओर इसलिए आकर्षित हुए क्योंकि उन दिनों शोधकार्य को पूरे समय के कैरियर के रूप में अपनाने की कोई ख़ास व्यवस्था नहीं थी। अन्य प्रतिभावान छात्र सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित होते थे। उनकी तैनाती कलकत्ता में हुई।

3. वाद्ययंत्रों पर किए जा रहे शोधकार्यों के दौरान उनके अध्यन के दायरे में जहाँ वायलिन, चैलो या पियानो जैसे विदेशी वाद्य आए, वहीँ वीना, तानपुरा और मृदंगम पर भी उन्होंने काम किया। उन्होंने वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर पश्चिमी देशों की इस भ्रान्ति को तोड़ने की कोशिश की कि भारतीय वाद्ययंत्र विदेशी वाद्ययंत्रों की तुलना में घटिया हैं। वाद्ययंत्रों के कंपन के पीछे छिपे गणित पर उन्होंने अच्छा-खासा काम किया और अनेक शोधपत्र भी प्रकाशित किए।

(क) रामन् ने किन भारतीय वाद्ययंत्रों पर काम किया?  (1)
(ख) रामन् ने पश्चिमी देशों की किस भ्रान्ति को तोड़ा?  (2)
(ग) उन्होंने वाद्ययंत्रों के किस विषय पर काम किया?    (2)

उत्तर

(क) रामन् ने वीना, तानपुरा, मृदंगम् जैसे वाद्ययंत्रों पर काम किया।
(ख) रामन् ने पश्चिमी देशों की इस भ्रान्ति को तोड़ने की कोशिश की कि भारतीय वाद्ययंत्र विदेशी वाद्ययंत्रों की तुलना में घटिया हैं।
(ग) उन्होंने वाद्ययंत्रों के कंपन के पीछे छिपे गणित पर अच्छा-खासा काम किया और अनेक शोधपत्र भी प्रकाशित किए।

4. रामन् सरकारी नौकरी की सुख-सुविधाओं को छोड़ सन् 1917 में कलकत्ता विश्वविद्यालय की नौकरी में आ गए। उनके लिए सरस्वती की साधना सरकारी सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण थी। कलकत्ता विश्विद्यालय की शैक्षणिक माहौल में वे अपना पूरा समय अध्यन, अध्यापन और शोध में बिताने लगे। चार साल बाद यानी सन् 1921 में समुद्र-यात्रा के दौरान जब रामन् के मस्तिष्क में समुद्र के नीले रंग की वजह का सवाल हिलोरें लेने लगा, तो उन्होंने आगे इस दिशा में प्रयोग किए, जिसकी परिणति रामन् प्रभाव के की खोज के रूप में हुई।

(क) रामन् कब कलकत्ता विश्वविद्यालय की नौकरी में आ गए?          (1)
(ख) वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में किस तरह समय बिताने लगे?       (1)
(ग) कौन-सी बात रामन् प्रभाव के की खोज के रूप में सामने आई?       (2)

उत्तर

(क) रामन् सन् 1917 में कलकत्ता विश्वविद्यालय की नौकरी में आ गए।
(ख) वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपना पूरा समय अध्यन, अध्यापन और शोध में बिताने लगे।
(ग) सन् 1921 में जब रामन् समुद्री यात्रा पर थे उस समय समुद्र के नीले रंग होने की वजह का सवाल रामन् प्रभाव की खोज के रूप में सामने आई।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये-

1. रामन् ने किस रहस्य से पर्दा हटाया?

उत्तर

रामन् ने समुद्र की नील वर्णीय आभा से पर्दा हटाया।

2. किन प्रश्नों के उत्तर खोजने के बाद रामन् विश्वविख्यात बन गए?

उत्तर

'समुद्र के पानी का रंग नीला ही क्यों होता है? कोई और क्यों नहीं होता है?' इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के बाद रामन् विश्वविख्यात बन गए।

3. रामन् के कॉलेज की पढाई कहाँ पूरी हुई?

उत्तर

रामन् ने कॉलेज की पढाई ए.बी.एन. कॉलेज तिरुचिरापल्ली से और फिर प्रेसीडेंसी कॉलेज मद्रास से की।

4. रामन् ने शोधकार्यों को छोड़कर सरकारी नौकरी क्यों अपनाया?

उत्तर

रामन् ने शोधकार्यों को छोड़कर सरकारी नौकरी इसलिए अपनाया क्योंकि उन दिनों शोधकार्य को पूरे समय के कैरियर के रूप में अपनाने की कोई ख़ास व्यवस्था नहीं थी। प्रतिभावान छात्र सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित होते थे।

5. 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस' एक अनूठी प्रयोगशाला क्यों थी?

उत्तर

इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस' प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य देश में वैज्ञानिक चेतना का विकास करना था। उस समय देश में ऐसे उद्देश्य के लिए समर्पित यह एकमात्र प्रयोगशाला थी इसलिए यह एक अनूठी प्रयोगशाला थी।

6. सर आशुतोष मुखर्जी ने रामन् के सामने क्या प्रस्ताव रखा?

उत्तर

सर आशुतोष मुख़र्जी ने रामन् के सामने सरकारी नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर का पद स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा।

7. रामन् की खोज से पहले अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना के अध्यन के लिए किसका उपयोग किया जाता था?

उत्तर

रामन् की खोज से पहले अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना के अध्यन के लिए इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग किया जाता था। यह तकनीक बेहद मुश्किल थी और गलतियों की संभावना भी अधिक रहती थी।

8. रामन् ने विदेशों में भी अपनी भारतीय पहचान को अक्षुण्ण रखा। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के बाद भी रामन् ने अपने दक्षिण भारतीय पहनावे को नहीं छोड़ा। वे शुद्ध शाकाहारी थे और मदिरा से सख्त परहेज करते।

पठन सामग्री और सार - वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्द्र शेखर वेंकट रामन्

NCERT Solutions for Class 9th: पाठ 5 - वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्द्र शेखर वेंकट रामन्

Saturday, 28 November 2015

पाठ 5 - नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया अन्य परीक्षापयोगी प्रश्न और उत्तर। क्षितिज भाग - I

Extra Questions and Answer from Chapter 1 Nana Sahab ki putri devi Maina ko bahsm kar diya gya Kshitiz Bhaag I

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

1. कानपुर में भीषण हत्याकाण्ड करने के बाद अंग्रेज़ों का सैनिक दल बिठूर की ओर गया। बिठूर में नाना साहब का राजमहल लूट लिया गया; पर उसमें बहुत थोड़ी संपत्ति अंग्रेज़ों के हाथ लगी। इसके बाद अंग्रेज़ों ने तोप के गोलों से नाना साहब का महल भस्म कर देने का निश्चय किया। सैनिक दल ने जब वहाँ तोपें लगाईं उस समय महल के बरामदे में एक अत्यंत सुन्दर बालिका आकर खड़ी हो गई। उसे देखकर अंग्रेज सेनापति को बड़ा आश्चर्य हुआ, क्योंकि महल लूटने के समय वह बालिका वहाँ कहीं दिखाई न दी थी।

(क) नाना साहब का महल कहाँ था?
(ख) अंग्रेज़ों ने महल तोप के गोलों से भस्म करने का निश्चय क्यों किया?
(ग) अंग्रेज़ सेनापति को महल के बरामदे में लड़की दिखने से आश्चर्य क्यों हुआ?

उत्तर

(क) नाना साहब का महल बिठूर में था।
(ख) अंग्रेज़ों ने महल तोप के गोलों से भस्म करने का निश्चय इसलिए किया क्योंकि उन्हें अपनी सरकार से आदेश था की नाना के सभी निशानियों को मिटा दे।
(ग) अंग्रेज़ सेनापति को महल के बरामदे में लड़की दिखने से आश्चर्य इसलिए हुआ क्योंकि महल को लूटते वक़्त वह लड़की उन्हें कहीं नहीं दिखाई दी।

2. उस समय लण्डन के सुप्रिसद्ध 'टाइम्स' पत्र में छटी सितम्बर को एक लेख में लिखा गया 'बड़े दुःख का विषय है, कि भारत सरकार आज तक उस दुर्दान्त नाना साहब को नहीं पकड़ सकी, जिस पर समस्त अंग्रेज जाति का भीषण क्रोध है। जब तक हम लोगों के शरीर में रक्त रहेगा, तब तक कानपुर में अंग्रेजों के हत्याकाण्ड का बदला लेना हम लोग न भूलेंगे। उस दिन पार्लियामेंट की 'हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स' सभा में सर टामस 'हे' की एक रिपोर्ट पर बड़ी हँसी हुई, जिसमे सर 'हे' ने नाना की कन्या पर दया दिखाने की बात लिखी थी।

(क) 'टाइम्स' पत्र के अनुसार दुःख का विषय क्या था?
(ख) 'टाइम्स' पत्र में छपे लेख का क्या मत था?
(ग) सर टॉमस 'हे' के रिपोर्ट पर हँसी क्यों हुई?

उत्तर

(क) भारत सरकार नाना साहब को पकड़ने में असफल रही जिसपर अंग्रज़ों के हत्याकाण्ड का आरोप था। यह 'टाइम्स' पत्र के अनुसार दुःख विषय था।
(ख) 'टाइम्स' पत्र में छपे लेख का मत था कि नाना के पुत्र, कन्या तथा अन्य कोई भी सम्बन्धी जहाँ भी मिले, मार डाला जाए।
(ग) सर टॉमस 'हे' ने अपने रिपोर्ट में नाना साहब, जिसपर समस्त अंग्रेज़ जाति का क्रोध था उसकी कन्या पर दया दिखाने की बात कर रहे थे।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

1. नाना साहब अपनी पुत्री मैना को अपने साथ क्यों नहीं ले जा सके?

उत्तर

नाना साहब कानपुर में अंग्रेज़ों के सामने असफल रहे जिसके वजह से उन्हें जल्दी में भागना पड़ा इस कारण वे अपनी पुत्री मैना को अपने साथ नहीं ले जा सके।

2. मैना 'हे' को कैसे जानती थी? उसने 'हे' से क्या मदद माँगी? पाठ के आधार पर लिखिए।

उत्तर

'हे' की पुत्री मेरी मैना की सहेली थी। पहले 'हे' नाना साहब से मिलने उनके महल जाया करते थे और मैना को भी अपनी पुत्री समान प्यार करते थे। इस प्रकार मैना 'हे' को जानती थी। उसने 'हे' से राजमहल के रक्षा की माँग की।

3. सेनापति 'हे' ने मदद करने में असमर्थता के पीछे क्या वजह दिया?

उत्तर

सेनापति 'हे' ने मदद करने में असमर्थता के पीछे नाना साहब के प्रति अंग्रेज सरकार के कड़े रुख का वजह दिया। उन्होंने कहा कि वह जिस सरकार के नौकर हैं, उसकी आज्ञा वे नहीं टाल सकते।

4. सेनापति 'हे' ने जनरल आउटरम से क्या निवेदन किया?

उत्तर

सेनापति 'हे' ने जनरल आउटरम से नाना साहब के महल को किसी तरह बचाने का निवेदन किया।

5. पाठ के आधार पर जनरल आउटरम के चरित्र का विश्लेषण कीजिये।

उत्तर

जनरल आउटरम अंग्रेजी सेना का जनरल था। वह क्रूर, निर्दयी और पत्थर हृदय व्यक्ति था। उसने मैना को राजमहल के अवशेषों पर से रोते हुए देखा और हथकड़ी डालकर गिरफ्तार किया और कानपुर के किले में कैद कर दिया। उसने मैना की की आखिरी इच्छा भी पूरी नहीं की और उसी किले में मैना को आग जलाकर भस्म कर दिया गया।

6. मैना ने जनरल आउटरम से क्या प्रार्थना की?

उत्तर

मैना ने जनरल आउटरम से कुछ वक़्त और देने की प्रार्थना की ताकि वह राजमहल के अवशेषों पर जी भर कर रो ले।

7. मैना सैनिकों के प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दे रही थी?

उत्तर

मैना महल के टूट जाने से दुःख में डूबी थी। वह अपने ख्यालों में खोयी थी। उसे अपने हालात का आभास ना था और ना ही कोई डर था इस कारण वह सैनिकों के प्रश्न का उत्तर नहीं दे रही थी।

8. ब्रिटिश पार्लियामेंट में सेनापति 'हे' की किस बात पर हँसी हुई?

उत्तर

ब्रिटिश पार्लियामेंट में सेनापति 'हे के रिपोर्ट में लिखी हुई उस बात पर हँसी हुई जिसमे उन्होंने नाना की कन्या मैना पर दया दिखाने की बात कही थी।

9. अंग्रेज़ों का नाना साहब के प्रति इतना क्रूर रवैया क्यों था? पाठ के आधार पर लिखिए।

उत्तर

नाना साहब अंग्रेज़ों के कट्टर विरोधी थे। वे कानपुर में हुए अंग्रेज़ों के विरुद्ध आंदोलन के शीर्ष नेता थे। कानपुर में हुए अंग्रेज़ों के हत्याकाण्ड को उन्होंने करवाया था। इस कारण अंग्रेज़ों का नाना साहब के प्रति इतना क्रूर रवैया था।

10. महाराष्ट्रीय इतिहासवेत्ता महादेव चिटनवीस के पत्र में क्या छपा?

उत्तर

महाराष्ट्रीय इतिहासवेत्ता महादेव चिटनवीस के पत्र में छपा कि कल कानपुर के किले में एक भीषण हत्याकाण्ड हो गया। नाना साहब की एकमात्र कन्या मैना धधकती हुई आग में जलाकर भस्म कर दी गयी।